जिस दिन मेरी रूह अपनी मौत से रूबरू होगी | मेरे अल्फ़ाज़ों की उन फरिस्तों से इल्तेज़ा होगी | ज़िन्दगी ने तोह हर तरह के ज़ख्म दिए हैं , क्या बादे-मौत, र…
दुआ  याद आई वो दुआ जो मैंने रब से मांगी है |  अपनी ख़ुशी तोह नहीं उसकी ही ख़ुशी मांगी है || आलिम ग़म ना कर, खुश रह, वो खुश है |  उसके चेह…